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6 January 2020

आज मन बहुत सारी बातों के जंजाल में उलझा हुआ है। चारों तरफ की दशाओं को देखकर लगता है क्यों सब इतना अस्थिर सा हो रहा है। मैं भारत का रहने वाला हूं तो शुरुआत यहीं से ही करूंगा। यह दौर है जब यहां की केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 को पारित करवा लिया है। इसके कारण पूरे ही देश में कई जगहों पर भारी संख्या में विरोध प्रदर्शन हो रहें हैं। दोनों मतों के लोगों में गुस्सा है इसको लेकर। पर क्या ही किया जा सकता है? यही सच्चे अर्थों में लोकतन्त्र है, जिसमें लोग अपने अंदर की भावना को एक शांतिपूर्ण तरीके से रखें, पर क्या ऐसा हो रहा है? जवाब आयेगा नहीं। 

वहीं यह सब हो ही रहा था कि एक चौंकाने वाली घटना और भी आ गई। जवाहलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कुछ लोगों ने आकर के यूनिवर्सिटी के लोगों पर हमला किया। यह सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि जिसने भी हमला किया अब उसके पास सारे तर्क वितर्क का अकाल पड़ चुका है। अगर ऐसा नहीं होता तो अभी भी बातें हो रही होती और नौबत हमले की ना आती। यह सब देख के लगता है क्या अर्थ बनता है मानव को प्रगति करने का अगर वह अभी भी जानवरों की तरह अपने आप को सही ठहराने में यकीन रखता है। यह सब बातें मन को झकझोर देती हैं। पुलिस की तफ़्तीश अभी भी जारी है, देखतें हैं कि क्या निकल कर आता है सामने। 

दूसरी खबर जो सामने निकल के आ रही है वह है ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग। इस आग के कारण बेजुबान जानवर, आदमी सभी परेशान जो चुके हैं। सैकड़ों हजारों जानवर और कई सारे आदमी अपनी जान खो चुके हैं। बेहद अफरा-तफरी का माहौल बन चुका है। हम लोग यहां से केवल प्रार्थना ही कर सकते हैं।

अभी और भी बहुत सारी बातें हैं जो मुझे करनी है जैसे कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, वेनेजुएला में अस्थिरता का माहौल, यमन का गृह युद्ध इत्यादि। 



धन्यवाद्!

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8 January 2020

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7 January 2020

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